।। कुशल नेतृत्व एवं मार्गदर्शन ।।

प्राचार्य सन्देश

डॉ. राधामोहन दास - प्राचार्य
डॉ. राधामोहन दास

षि-मुनियों के तप से पवित्र की हुई पर्वतों के राजा हिमालय की तलहटी में, कल-कल ध्वनि से अखण्ड गतिशील पिघली हुई बर्फ की निर्मल जलधारा से परिपूर्ण परम पावनी माँ भागीरथी जी के निकटस्थ तट पर तथा खिले हुए विभिन्न फूलों की सुगंध मिश्रित मन्द-मन्द प्रवाहित वायु और प्राकृतिक सौन्दर्य से सुशोभित, विश्व प्रसिद्ध पर्यटक स्थल रामझूला के समीप स्थित श्री दर्शन महाविद्यालय के प्रथम सेवक होने के नाते, सभी संस्कृत अनुरागियों, संस्कृतज्ञों, प्रशासनिक अधिकारियों, प्रबन्धतन्त्र, शिक्षकों, कर्मचारियों, अभिभावकों एवं प्रिय छात्रों का हृदय से अभिनन्दन करते हुए मैं स्वयं को धन्य अनुभव करता हूँ।

धर्म, पुराण-इतिहास, दर्शनादि शास्त्रों का संरक्षण-संवर्धन, प्रचार-प्रसार तथा भारतीय सनातन संस्कृति परम्परा को आगे बढ़ाने एवं ज्ञानपिपासु छात्रों के व्यक्तित्व विकास के लिए प्रातः स्मरणीय योगिराज १००८ श्री राघवाचार्य महाराज जी के द्वारा सन् १९१० ई. में श्री दर्शन महाविद्यालय स्थापित किया गया है। प्रथमा प्रथम से उत्तर मध्यमा द्वितीय पर्यन्त (कक्षा ६ से १२ तक) कक्षाओं की सम्बद्धता उत्तराखण्ड संस्कृत शिक्षा परिषद् तथा शास्त्री और आचार्य कक्षाओं की सम्बद्धता उत्तराखण्ड संस्कृत विश्वविद्यालय से है।

श्री दर्शन महाविद्यालय में नव्यव्याकरण, साहित्य, ज्योतिषादि शास्त्रीय विषयों की तथा विज्ञान, गणित, हिन्दी, समाजशास्त्र, राजनीति विज्ञान, अर्थशास्त्रादि आधुनिक विषयों की मान्यता है। भारत सरकार के निर्देश के अनुसार औपचारिक रूप से इन सभी विषयों का विधिवत् अध्ययन होता है।

छात्रों के बहुमुखी विकास के लिये अनौपचारिक रूप से वेदाध्ययन, संस्कृत सम्भाषण, रुद्राभिषेक और कर्मकाण्ड का अहर्निश अध्ययन-अध्यापन किया जाता है। सम्पूर्ण पर्वतीय क्षेत्र, विभिन्न प्रान्तों और विदेशों से ब्रह्मचारी बालक यहाँ आकर अध्ययन करते हैं। यहाँ से पढ़ा हुआ छात्र विभिन्न सरकारी पदों पर सेवारत है और व्यक्तिगत पुरुषार्थ से समाज, देश तथा विश्व के विकास कार्य में अविच्छिन्न रूप से संलग्न है।

डॉ. राधामोहन दास

(प्राचार्य) श्री दर्शन महाविद्यालय,
मुनि की रेती, टिहरी गढ़वाल,
उत्तराखण्ड

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