।। अनुशासन एवं संस्कार ।।
छात्रावास नियम
छात्रावासस्य नियमानुबन्धपत्रम्
प्रातः स्मरणीय पूज्यपाद वैकुण्ठवासी परमवैष्णव षड्दर्शनाचार्य 1008 स्वामी श्री राघवाचार्य जी महाराज द्वारा स्थापित श्री दर्शन महाविद्यालय वर्ष 1919 से अद्यावधि पर्यन्त वैदिक ऋषि-परम्परा की ज्ञान-विज्ञानमयी अजस्र धारा से अभिसिंचित भारतीय वाङ्मय की व्याकरण, साहित्य, ज्योतिष, अमूल्यनिधि, वेदों के रक्षार्थ कर्म-काण्ड, योग-अध्यात्म एवं सन्ध्या-गायत्री, भावातीत ध्यान के नियमित अभ्यास हेतु छात्रों को आवासीय सुविधा प्रदान करता है।
यह अपेक्षा की जाती है कि विद्यार्थी छात्रावास के नियमों का स्वेच्छा से अनुपालन करें। अभिभावक तथा छात्र द्वारा स्वीकृत नियमों के अन्तर्गत ही छात्र की आवासीय पात्रता निहित है, अर्थात् नियमों का उल्लंघन करने पर उसे स्वतः छात्रावास से पृथक् होना पड़ेगा।
छात्रावास के अनिवार्य नियम
“विप्रो वृक्षः तस्य मूलं च सन्ध्या” — इस शास्त्र निर्देशानुसार प्रत्येक छात्र को प्रातः-सायंकालीन सन्ध्योपासना, गायत्री जप एवं भावातीत ध्यानादि में पूर्ण मनोयोग से उपस्थित होना अनिवार्य है।
कर्म-काण्ड एवं उपासना को दृष्टिगत रखते हुए नित्यप्रति शिवार्चन (रुद्राभिषेक) विद्यालय में सम्पन्न किया जाता है। अतः कर्म-काण्ड सीखने के लिए छात्रावास से बाहर अनुष्ठान करने की अनुमति प्रदान नहीं की जायेगी। विशेष परिस्थिति में छात्रावास अधीक्षक/प्रधानाचार्य की विवेकाधीन व्यवस्था द्वारा अल्पावधि अनुष्ठान सम्पन्न कराया जा सकता है।
आवासीय परिसर में मोबाइल पूर्णतः वर्जित है। यदि किसी भी परिस्थिति में आवासीय छात्र द्वारा मोबाइल तथा इन्टरनेट (फेसबुक या अन्य कोई भी आईडी) का प्रयोग किया जाता है, तो उसे तत्काल आवासीय सुविधा से वंचित करते हुए छात्रावास से निष्कासित कर दिया जायेगा। ऐसी स्थिति में अभिभावक का विद्यालय प्रबन्धन के समक्ष कोई विवाद (वाद) मान्य नहीं होगा। सूचना मिलते ही बालक को लेने स्वयं उपस्थित होना होगा।
अपरिहार्य स्थिति में छात्र यदि घर से मोबाइल लेकर आता है, तो तत्काल उसे छात्रावास अधीक्षक के पास जमा करा दें। विद्यालय परिसर में या बाहर कहीं भी मोबाइल रखने वाले छात्र को आवासीय सुविधा से पृथक् कर दिया जाएगा।
लिखित आज्ञा लिए बिना कोई भी छात्र परिसर से बाहर नहीं जाएगा। बिना आज्ञा जाने पर किसी भी घटना का छात्र स्वयं जिम्मेदार होगा। छात्र को किसी भी प्रकार का वाहन चलाने की अनुमति नहीं है तथा होटल आदि सार्वजनिक स्थानों पर कुछ भी खाना निषेध है।
छात्र अपने सामान की सुरक्षा स्वयं करेंगे। कोई भी सामान खो जाने पर छात्र स्वयं जिम्मेदार होगा।
स्वच्छ तथा स्वावलम्बी जीवन के अभ्यास हेतु अपने कक्ष एवं परिसर की नित्यप्रति सफाई (श्रमदान के रूप में) सम्पादित करना अनिवार्य है। साथ ही नित्यप्रति स्नान, दन्तधावन तथा स्वच्छ धुले हुए वस्त्र पहनकर वैष्णव तिलक धारण करना अत्यावश्यक है।
यदि कोई छात्र पहले से अस्वस्थ रहता है तो अभिभावक द्वारा प्रवेश के समय सम्पूर्ण जानकारी देनी होगी। बार-बार बीमार होने की स्थिति में छात्र को अभिभावक के सुपुर्द कर दिया जाएगा। कक्ष के अन्य छात्रों का कर्तव्य है कि बीमार छात्र की सूचना अधीक्षक/प्रधानाचार्य को दें。
बिना अभिभावक के किसी भी छात्र को अवकाश नहीं दिया जाएगा तथा अवकाश के उपरान्त भी अभिभावक को साथ लेकर आना होगा।
छात्रावास अधीक्षक द्वारा अग्रसारित अवकाश प्रार्थनापत्र पर ही आवासीय छात्रों का अवकाश प्रधानाचार्य द्वारा स्वीकृत किया जाएगा।
कोई छात्र अपने अभिभावक को अधीक्षक/प्रधानाचार्य की अनुमति के बिना छात्रावास में लेकर नहीं जाएगा। किसी भी अभिभावक को छात्रावास में रात्रि विश्राम की आज्ञा नहीं दी जायेगी।
अवकाशोपरान्त निर्धारित समय पर छात्रावास में उपस्थित होना अति अनिवार्य है, अन्यथा अनुशासनात्मक कार्यवाही की जाएगी।
छात्रावासीय छात्र किसी भी बाह्य व्यक्ति या बाहरी छात्र को छात्रावास में प्रविष्ट नहीं करायेंगे।
छात्रावासीय व्यवस्था विविधता में एकता का जीवन्त दर्शन है, अतः सभी छात्रों को परस्पर सौहार्द एवं मैत्रीपूर्ण व्यवहार रखना अनिवार्य है। लड़ाई-झगड़ा, कलह, चुगली, गुटबाजी, किसी भी प्रकार का दुर्व्यसन तथा चोरी करने वाले छात्रों को तत्काल निष्कासित कर दिया जायेगा।
छात्रावास सम्बन्धित आवश्यक सामग्री
रजाई, गद्दा, दरी, चादर (2), तकिया, बक्सा, ताला
कच्छा (2), बनियान (2), गमछा
थाली, गिलास, कटोरी, चम्मच
आसन, चन्दन + रोली, गोमुखी, माला, पंचपात्र एवं कटोरी
साबुन (नहाने + कपड़े धोने का), तौलिया, मंजन, ब्रश, तेल, शीशा, कंघी
पीली धोती (2), सफेद कुर्ता (2), स्वैटर फुलबांह (महरूम रंग)
श्रीमद्भगवद्गीता, दुर्गासप्तशती, रुद्राष्टाध्यायी, संध्योपासन पुस्तिका, रामचरितमानस (गुटका), हनुमान चालीसा, गंगालहरी, स्तोत्ररत्नावली, नित्यकर्म पूजाप्रकाश
पुस्तकें रखने का बस्ता (बैग), पाठ्यपुस्तकें (कक्षानुसार) तथा लेखन-उत्तर पुस्तिका (विषयानुसार)